Monday, 20 July 2015

बासनी बेलिमा

♤ बासनी ♤

इस मुस्लिम बहुल्य गांव से समझे पानी की एक-एक बूंद की कीमत
इस मुस्लिम बहुल्य गांव से समझे पानी की एक-एक बूंद की कीमत
गर्मी का मौसम अब नागौर के बासनी गांव के लोगों को कतई परेशान नहीं करता. वहां के लोग तो बल्कि दावा करते हैं कि उनके गांव में पीने के पानी की समस्या पैदा हो ही नहीं सकती

असल में बासनी के परंपरागत पेयजल स्रोत गोरधन तालाब में इतना पानी है कि अगली बारिश तक लोगों की जरूरत मजे से पूरी हो जाएगी. और अभी बारिश का दौर जरी है.तालाब के पानी का यहां ऐसा पुख्ता और बेहतर प्रबंधन किया गया है, जो एक सूखे प्रदेश में जल संरक्षण के अच्छे खासे सबक की तरह है.
पानी की अहमियत इस गांव ने 1984 में ही समझ ली थी. उन दिनों तालाब में पालतू पशुओं का डेरा जमा रहता था. नतीजाः पानी में सड़न, गंदगी और दुर्गंध. गांव के घरघर में चमड़ी का खतरनाक नारू रोग फैलने लगा, जो कि सड़ते पानी में पनपे एक परजीवी से पैदा होता है.
पेयजल के  लिए भी स्थिति विकराल हो गई. बड़े बूढ़ों ने तालाब के किनारे बैठकर विचार किया और नागौरी कौमी फंड नाम की कमेटी गठित की. कमेटी के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद कासम कश्मीरी बताते हैं, ”दरदर की ठोकरें खाने की बजाए हमने तालाब से ही समाधान निकालने की सोची.” कमेटी ने सबसे पहले तालाब की खुदाई करवाकर उसकी चारदीवारी बना दी. इससे पानी साफसुथरा रहने लगा. लेकिन गांव के एक वर्ग का इस साफसुथरे पानी पर एकाधिकार सा हो गया. गरीब क्या करे? पानी सबको मिले, इसके लिए सबसे पहले तालाब पर 3,000 रु. की तनख्वाह पर एक चौकीदार नियुक्त किया गया.
इसके अलावा गांव के 4,000 परिवारों के लिए कूपन छपवाए गए. महीने की पहली तारीख को कूपन बांटे जाते हैं. प्रति परिवार 11 कूपन. एक कूपन में एक टैंकर पानी. सप्लाई के लिए 10-12 टैंकर हैं. कूपन भी पानी की उपलब्धता देखकर दिए जाते. गर्मी के मौसम में तीन महीने में एक कूपन.
यह व्यवस्था आराम से चलने लगी. इस बीच कई लोगों क शिकायतें आईं कि उन्हेंसाल में 4 कूपन दिए गए लेकिन पड़ोसी को पांच मिले. समस्या पैर फैलाती, उससे पहले ही कुशल प्रबंधन का परिचय देते हुए कमेटी ने इसका निराकरण कर लिया.
सभी परिवारों के लिए राशन कार्ड बनवाए गए. इसमें पानी दिए जाने वाले महीने के सामने और उस महीने के कूपन दोनों पर मोहर लगाई जाने लगी. अब किसको कितना पानी मिला, उसका रिकॉर्ड कमेटी के रजिस्टर और परिवार के  राशन कार्ड दोनों में दर्ज होता है. टैंकर वाले मनमानी न करें, इसके  लिए उन्हें हिदायत दी गई. गांव के किसी भी कोने तक पानी ले जाने का किराया 130 रुपए. तालाब के चौकीदार, राशन, कूपन और साफसफाई के  लिए गांव वालों के अलावा उन लोगों का सहयोग लिया जाता है, जो गांव के बाहर व्यवसाय करते हैं.
पानी चोरों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए गए. एक बार चौकीदार से मिलीभगत कर टैंकर वाला बिना कूपन के ही पानी लिए जा रहा था. गांववालों ने उसे पकड़ा और 2,200 रु. जुर्माने के साथ पानी भरने के लिए उस पर हमेशा के लिए पाबंदी लगा दी. चौकीदार को भी हटा दिया गया.
तालाब का पानी भविष्यमें कम न पड़े और न ही पानी की आवक कम हो, इसके लिए भी कमेटी के लोगों ने दूरदृष्टि अपनाई. खजांची शौकत अली बताते हैं, ”कमेटी ने पिछले दिनों 20 बीघा जमीन खरीदी, अंगोर (यानी कि पानी आने के रास्ते) के लिए. सरकारी रिकॉर्ड में भी इसे इसी नाम से दर्ज करवा दिया गया है.” 25 साल से तो बासनी गांव में पानी का कोई संकट पैदा हुआ नहीं. आवक का रास्ता बन जाने के बाद आगे भी शायद ही ऐसी नौबत आए.

Wednesday, 15 July 2015

कुरान की आयत को मिटाना कैसा ह

☝ जो लोग ये कहते है कि कुरआन की आयात सेल फोन��(मोबाईल) से  Delete (डिलीट)करना कयामत की निशानियों मे से है। उसका मुख़्तसर सा जवाब।����
�� कुरआन की आयात या दीनी massage को delete करना कैसा है ? ��
������हदीस:-:-
अमल का दारोमदार नियत पर है और हर शख्स को वही मिलता है जिसकी वो नियत करे ! ��
{सही बुखारी शरीफ-हदीस न..5070}
तो अगर आप किसी आयत या दीनी massege को Delete करते हो तो आपकी नियत गलत नहीं होती इसलिए गुनाह नहीं होगा !!✨
��आजकल Whatsapp पर इस तरह के बहुत सारे Massage आते रहते हैं । ✨
����मेरे दोस्तों सबसे पहली बात तो ये समझले कि कुरआन ए करीम को न मिटाया जा सकता है और न इसमें रहती दुनिया तक कोई तबदिली आ सकती है क्योकि इस मुक़द्दस किताब कुरआन की हिफाज़त की जिम्मेदारी खुद खुदा ने ली है।अल्लाह खुद कलामे पाक में फरमाता है कि- "हमने इस कुरआन को नाज़िल किया और हम ही उसकी हिफाज़त करने वाले(और निगेहबान)है।"(��सूरः हिज्र 9 पारा 14)✨
��अब आप बताओ मेरे ��दोस्तों कि अल्लाह जिस चीज़ की हिफाज़त करे उसे मिटाया या बर्बाद कैसे किया जा सकता है।✨
����दूसरी बात ये कि कुरआन के मिटाने की जहाँ तक बात है या डिलीट करने की तो दोस्तो जब हमें मदरसे में पढ़ाया जाता है तो ब्लैक बोर्ड पर कुरआन की आयतों को लिख कर बच्चों को समझया जाता है और फिर दूसरी आयत लिखने के लिए पहली आयत मिटा दी जाती है !��
♻अगर इस बात को देखा जाये तो यहाँ भी डिलीट या मिटाने का सिस्टम है तो इस हिसाब से मदरसे को भी बंद कर देना चाहिए !✨
��दोस्त अगर आपके या मेरे घर में या किसी भी मुस्लिम के घर में बहुत पुराना ज़ईफ कलामे पाक हो और बेहद खस्ता हालत में हो जिसके सफे निकल रहे हों तो ऐसी हालत में उसे आप क्या करेंगे ?✨
��ऐसी हालत में उसे नदी में बहाया जाये या फिर किसी कुएं में डाला जाए तब तो लोग ऐसा कहेंगे की ये लो ये तो पूरा कुरआन ही मिटा दिया !
����कुरआन की आयतों को मिटा देने का मतलब ये नही की तुम अपने हाथों से कुरआन को लिखोगे और मिटा दोगे।
बल्कि कुरआन की आयते मिटा देने का मतलब ये है कि तुम उसे पढ़ोगे फिर भी उस पर अमल नही करोगे।
��खुद हज़रत उसमान गनी रज़िo के वक़्त कुछ ज़ाईद नुस्को को जलाया भी गया था।✨
♻��फिर सिर्फ हाथ से लिखकर मिटा देना या नेट सेल फोन पर टाईप करके Delete कर देना से कोई फर्क नही पढ़ेगा. इन्शाअल्लाह।����
��कुछ लोगों का ये भी कहना है के मोबाईल पाक नहीं होता और सही गलत चीजें मोबाईल में रहती इसलिए कुरआन की आयतों को मोबाईल में नहीं रखना चाहिए !✨
���� हम मानते है कि मोबाईल में कुछ लोग गलत चीजें भी रखते हैं और कुरआन की आयतों को भी रखते हैं लेकिन यह मसला तो हमारी ज़ुबान का भी है ज़ुबान से तो हम गाली गलोज भी करते हैं गीबत भी करते हैं झूठ भी बोलते हैं चुगली भी करते हैं और फिर उसी ज़ुबान से कुरआन ए पाक की तिलावत भी करते हैं !✨
����तो ऐसे हाल में क्या कोई ये कहेगा के ज़ुबान कटवा देनी चाहिए या फिर कुरआन की तिलावत उस ज़ुबान से नहीं करनी चाहिए !दोस्तों ऐसा कहना तो बेवकूफी होगा !✨
��मेरे दोस्तों इस तरह के Massage इस्लाम के दुश्मनों की तरफ से भेजे जाते हैं और भोले भाले हमारे मुस्लिम भाई बीना सोंचे समझे उसे आगे फॉरवर्ड करते जाते हैं जिसकी वजह से जो भी इस्लाम की जानकारी एक दूसरे को मिल रही होती है वो भी मिलना बंद हो जाती है और दुश्मन अपनी चाल में कामयाब हो जाता है !✨
����मेरे दोस्तों आज इस्लाम दुनिया के हर कोने कोने में बहुत तेजी से फ़ैल रहा है इसलिए दुश्मनाने इस्लाम इसे रोकने की हर तरह की कोशिश करते रहते हैं लेकिन तारीख़ गवाह है हर दौर में हमारी खिलाफत रही है ! पर शर्त ये है के हम अल्लाह के हुक्म और नबी की सुन्नतों पर चलने वाले सच्चे मोमिन बन जाएँ । ✨
��अल्लाह हम सबको सही समझ अता फरमाए और गलत सही की पहचान करने की तौफीक अता फरमाए !!✨
          आमीन!!
♻ये बात सभी को बताए ताकि हमारे भाई गुमराह ना हो।✨