शबे-क़द्र मुबारक
(The Night of Power)
☆ ☆ ☆ ﴾ ﷽ ﴿ ☆ ☆☆
इन्ना अज़लनाहु फी लयलतिल क़द्र ● वमा अदराका मालयलतुल क़द्र ● लयलतुल क़दरी ख़यरुम्मिन अल्फीशहरी ● तनज्ज़लुल मलाइकतु वर्रुहु फियहा बीइज़नि रब्बिहीम मीन कुल्ली अमरि ● सलाम ! हिया हत्ता मतलाइल फज्र ●
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तर्जुमा :- कंजुल ईमान-
बेशक हमने इसे शबे-क़द्र में उतारा । और तुमने क्या जाना, क्या शबे क़द्र । हजारों महीनों से बेहतर । इसमें फ़रिश्ते और जिब्राइल उतरते है, अपने रब के हुक़्म से । हर काम के लिये, वो सलामती है । सुबह चमकने तक ।
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यहाँ इस सुरह को शबे क़द्र की ख़ुशी में बताने के लिये लिखा गया है । इसे अरबी ज़बान में देख कर पढ़ना बेहतर है । इस रात में इस दुआ को खूब पढ़े ।
शबे क़द्र की तलाश करो रमजान के आखरी अशरे की ताक रातों में । ताक यानी विसम संख्या (Odd number) ये ताक रातें है- 21,23,25,27,29
हमारे बुज़ुर्गाने दीन ने 27वीं रात में शबे क़द्र की निशानियों को पाया ।
इन अफज़ल रातों में हमारे नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम कब्रस्तान जाया करते, तो हमारे लिये कब्रस्तान जाना सुन्नत है ।
इस रात में इबादत और खूब दुआ करें ।
या अल्लाह हम गुनहगारों पर रहम फरमा और तेरी रहमत वाली बारिश दे ।
या अल्लाह तेरे हबीब के सदक़े में तमाम आलमे इस्लाम के मुसलमानों की जान, माल, इज्ज़तो आबरू की हिफाज़त फरमा ।
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