Wednesday, 9 March 2016

ये वाकिया 2015 के सादी सम्मेलन में हुवा

अस्सला मुअलईकुम
एक पैगाम अहले बासनी के नाम

क्या कॉम के हम दर्द सॉ रहें हैं या उन्होंने अपना जमीर बैच दिया ह ?
अगर नहीं तो सादी सम्मेलन में गुस्ताख़ ऐ रसूल (चंद वहाबी जो पकिस्तान से आए हैं) को आने की इजाजत किस तरह मिल गई
क्या इस कॉम को अल्लाह और उसके हबीब से ज्यादा इन गुस्ताखो से मोहब्बत ह? अगर नहीं तो इन के खिलाफ अब तक आवाज क्यों नहीं उठी ?  हमने तो आज तक यही देखा और सूना ह जिस घर में वहाबी देवबन्दी हो उस घर में अगर सादी हो तो उस वहाबी को सादी में नहीँ आने दिया जाता ।
चाहे वो दूल्हे का सगा बाप ही क्यों ना हो
फिर आज इस कॉम के जिम्मेदारान को क्या साँप सुंग गया ह जो इन बदबख्तों के खिलाफ कोई ऐक्शन नहीं लिया जा रहा ह ?
मैने तो यहां तक सूना ह के इन कुत्तों को पगड़ियाँ बंधवा कर इन का इस्तक बाल किया जाएगा
हालां के कोमी जमात के जिम्मेदारां ने इस बात से साफ़ मना किया ह के इन्हें हम ने नहीं बुलाया और ना ही पगड़ियाँ बंधवाई जाएँगी
लेकिन जिस किसी ने भी इन्हें यहाँ बुलाया ह वो तो इन की इज्जत अफजाई के लिए पगड़ियाँ बन्धवाएगा और उन्हें अपनी सादी में साथ लाएगा ।
क्या पूरी कॉम इस एक सख्स के सामने झुक जाएगी ।
क्या होगा हमारे आबाओ अजदाद (ओलमाए बासनी )की कुर्बानियों का जिंहोने ऐसे लोगों के बिया सादी में जाने से खुद भी रुके और आप को भी रोका
क्या हमारी कॉम ओलमा ऐ अहले सुन्नत की बातों को भूल गई
जब हम वहाबियों से बेटी वेहवार नहीं करते ना ही उनकी सादियों में जाते हैं तो इन बदबख्तो को अपनी सादियों में क्यों आने दें

नोटः
अगर आप इन कुत्तों के आने से खुस नहीं हैं तो इस मैसेज को कॉपी कर उस में अपना नाम भी जोड़ कर अपने दोस्तों को सेंड करें और कॉम के जिम्मेदारान को ये ऐसाश दिलाएं के आप किसी के दबाव में आकर  अपनी जिम्मेदारी से पीछे ना हटें और कुत्तों को सादी सम्मेलन में ना आने दें

मोहम्मद अली बादर वाला
9509304362

कोमी जमात

🌷🌷🌷मौलाना ज़हूर अहमद अलैहिर्रहमा का एक मजमून जो 1988 में रिसाला सूफिया जो हमारे गांव से निकलता था उस में से चन्द बातें जो हर उस मुसलमान के लिए हें जिन को मुसलमान अपने किसी मामले में फैसला करने वाला बनाएँ 🌷हदीस (1)हजरते माअकल बिन यसार रज़िअल्लाहो अन्हो कहते हें मेने रसूलअल्लाह सल्लाहो अलेह वसल्लम से ये इरशाद फरमाते  सुना के जो सख्स मुसलमानों के इज्तेमाई मामलात का जिम्मेदार हो और उन के साथ खयानत करे (यानी सही फैसला ना करे )तो अल्लाह तआला उस पर जन्नत हराम कर देगा 🌷हदीस (2)हुज़ूर सल्लाहो अलेह वसल्लम ने फ़रमाया कयामत के दिन बदतरीन हालत में वोह सख्स होगा जिसने दूसरों की दुनिया बनाने के लिए ना जायज तरफ दारी से या झूटी गवाही दे कर अपनी आकेबत बरबाद कर ली🌷हदीस (3)फ़रमाया हुज़ूर सल्लाहो अलेह वसल्लम ने जो काज़ी (फैसला करने वाला )बनाया गया गोया बगैर छुरी के ज़िबह (हलाल)कर दिया गया (यानी बहुत बड़े इम्तेहान में मुब्तला कर दिया गया)🌸इन हदीसो से अंदाज़ा लगाइये के कोम के इज्तेमाई जिम्मा का काम कितनी बड़ी जिम्मेदारी का काम ह लेहाज़ा इस राह के राही को फुंक फुंक कर कदम रखना चाहिये क्यों के जहां कदम लड़खड़ाया ईमान खतरे में पड़ा🌷🌷बिशारत 🌷🌷खीदमते खल्क का ओहदा बड़ा मुबारक ओहदा ह उस सख्स के लिए जो इंसाफ से फैसले करे 🌷हदीस 🌷फ़रमाया हुज़ूर सल्लाहो अलेह वसल्लम ने इंसाफ करने वाले हाकिम का एक दिन अफज़ल ह 70साल की इबादत से🌸बड़े खुस नसीब है वोह लोग जिन्हें ऐसे ओहदों पर फ़ाइज़ होकर खीदमते ख़ल्क़ करने का सुनहरा  मोका मिले और अदलो इंसाफ की राह में साबित कदम रह कर दुनिया में इज्जत और आख़िरत में जन्नत के मुस्तहिक़ बनें🌷जमाअत की बरकतें 🌷जमाअत पर अल्लाह तआला की रहमत होती ह और जमाअत की बरकत से कोम बा वक़ार और उस के अफ़राद (पब्लिक)सुपर पॉवर बन जाते हें🌷🌷फर्द कायम रब्त मिल्लत से ह तन्हा कुछ नही 🌸मोज ह दरया में और बेरुन दरया कुछ नही🌸21 मोहर्रम 1409 हिजरी (3/9/1988)ईसवी