Wednesday, 9 March 2016

कोमी जमात

🌷🌷🌷मौलाना ज़हूर अहमद अलैहिर्रहमा का एक मजमून जो 1988 में रिसाला सूफिया जो हमारे गांव से निकलता था उस में से चन्द बातें जो हर उस मुसलमान के लिए हें जिन को मुसलमान अपने किसी मामले में फैसला करने वाला बनाएँ 🌷हदीस (1)हजरते माअकल बिन यसार रज़िअल्लाहो अन्हो कहते हें मेने रसूलअल्लाह सल्लाहो अलेह वसल्लम से ये इरशाद फरमाते  सुना के जो सख्स मुसलमानों के इज्तेमाई मामलात का जिम्मेदार हो और उन के साथ खयानत करे (यानी सही फैसला ना करे )तो अल्लाह तआला उस पर जन्नत हराम कर देगा 🌷हदीस (2)हुज़ूर सल्लाहो अलेह वसल्लम ने फ़रमाया कयामत के दिन बदतरीन हालत में वोह सख्स होगा जिसने दूसरों की दुनिया बनाने के लिए ना जायज तरफ दारी से या झूटी गवाही दे कर अपनी आकेबत बरबाद कर ली🌷हदीस (3)फ़रमाया हुज़ूर सल्लाहो अलेह वसल्लम ने जो काज़ी (फैसला करने वाला )बनाया गया गोया बगैर छुरी के ज़िबह (हलाल)कर दिया गया (यानी बहुत बड़े इम्तेहान में मुब्तला कर दिया गया)🌸इन हदीसो से अंदाज़ा लगाइये के कोम के इज्तेमाई जिम्मा का काम कितनी बड़ी जिम्मेदारी का काम ह लेहाज़ा इस राह के राही को फुंक फुंक कर कदम रखना चाहिये क्यों के जहां कदम लड़खड़ाया ईमान खतरे में पड़ा🌷🌷बिशारत 🌷🌷खीदमते खल्क का ओहदा बड़ा मुबारक ओहदा ह उस सख्स के लिए जो इंसाफ से फैसले करे 🌷हदीस 🌷फ़रमाया हुज़ूर सल्लाहो अलेह वसल्लम ने इंसाफ करने वाले हाकिम का एक दिन अफज़ल ह 70साल की इबादत से🌸बड़े खुस नसीब है वोह लोग जिन्हें ऐसे ओहदों पर फ़ाइज़ होकर खीदमते ख़ल्क़ करने का सुनहरा  मोका मिले और अदलो इंसाफ की राह में साबित कदम रह कर दुनिया में इज्जत और आख़िरत में जन्नत के मुस्तहिक़ बनें🌷जमाअत की बरकतें 🌷जमाअत पर अल्लाह तआला की रहमत होती ह और जमाअत की बरकत से कोम बा वक़ार और उस के अफ़राद (पब्लिक)सुपर पॉवर बन जाते हें🌷🌷फर्द कायम रब्त मिल्लत से ह तन्हा कुछ नही 🌸मोज ह दरया में और बेरुन दरया कुछ नही🌸21 मोहर्रम 1409 हिजरी (3/9/1988)ईसवी

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