[12:24PM, 12/27/2014] मुहम्मद अली बादर वाला: अस्सला मुअलइकुम
दोस्तों चुनाव करीब आरहे हें।
और इस बार लोग मोजुदा सरपंच को वोट ना देकर पूर्व सरपंच को वोट देने की बात कर रहे हें।
क्या पूर्व सरपंच ने विकास किया ह?
ये दोनों एक जेसे ही हें ।
5 साल तेरी बारी 5 साल मेरी बारी वाली निति अपना रहे हें।
कुछ लोग कहते हें के आज तक जो विकास हूवा ह वो किसने किया ।
जहां तक मैं जानता हूँ ।
बासनी में 80% विकास MLA साहब के फंड से हुवा ह।
चाहे वो रोड़ का काम हो या पानी या लाईट का इसे एक तरफ रख दो और क्या विकास हुवा है बासनी में?
और जब भी MLA फण्ड से कोई काम हो रहा होता है लोग वहां जाकर खड़े हो जाते हें और कहते हें ये हम करवा रहे हें (काम किसी का और नाम किसी का)
मैने इंटरनेट पर राजस्थान सरकार की बहुत सी वेबसाइट्स का निरिक्सन किया है ।
और देखा ह राज्य सरकार की और से मिलने वाली सहूलियतों का सब से कम लाभ बासनी को मिला है क्या इस सब के लिए हमारे वार्ड मेंबर और सरपंच जिम्मेदार नहीं हें?
क्या बुजुर्गों को मिलने वाला बत्ता उन के घर तक पहुँचाने का बन्दोबस्त हमारे सरपंच नहीं कर सकते ?
अगर इतना भी नहीं कर सकते तो इन्हें इस पद पर रहने का क्या हक हे
क्या हम किसी और को इस की जिम्मेदारी नहीं सोंप सकते?
क्या हम इस में बदलाव नहीं ला सकते ?
जागो बासनी वासियों जागो
और इस पोस्ट को अपने हर एक दोस्त को सेंड करो
बदलाव ही विकास है।।।।।
[7:20PM, 12/30/2014] मुहम्मद अली बादर वाला: हमारी पंचायती राज व्यवस्था में ढेरों कमियां हैं पर मोटे तौर पर निम्न बातें इस व्यवस्था का गला घोटे हुए हैं
- (क) पंचायतों को बहुत कम अधिकार व शक्तियां दिये गये हैं। सरकारी कर्मचारियों और सरकारी फ़ंड पर पंचायतों का किसी तरह का कोई नियंत्रण नहीं है।
(ख) जो थोड़े बहुत अधिकार पंचायतों को दिये भी गये हैं वो सभी सरपंच या प्रधान में निहित हैं। किसी भी पंचायत में सरपंच ही सर्वे सर्वा है। वही सभी निर्णय लेता है। ग्राम सभाओं को यानि कि लोगों को किसी तरह का कोई अधिकार नहीं है। अधिकांश पंचायती राज क़ानूनों में ग्राम सभा को केवल सरपंच को सलाह देने का अधिकार है - सरपंच उस सलाह को मानने या न मानने के लिए स्वतंत्र है।
(ग) इसीलिए अधिकतर सरपंच भ्रष्ट हो गए हैं। जब वो भ्रष्टाचार करते हैं तो लोगों को उसके ख़िलाफ किसी प्रकार की कोई कार्रवाई करने का कोई अधिकार नहीं दिया है। लोग केवल बेबस होकर देखते रहते हैं।
(घ) सरपंच के भ्रष्ट निकम्मे या गै़र ज़िम्मेदाराना व्यवहार के ख़िलाफ कार्रवाई करने का अधिकार कलक्टर को दिया गया है। कलक्टर किसी भी सरपंच के ख़िलाफ कभी भी कोई भी कार्रवाई शुरू कर सकता है। उन्हें निलंबित कर सकता है। इसीलिए अधिकतर सरपंच कलक्टर और बी्डीओ् से डरे रहते हैं। किसी भी ज़िले में कलक्टर एक तरह से राज्य सरकार के नुमाइंदे के रूप में काम करता है। जैसे राज्य सरकार में गवर्नर केन्द्र सरकार का नुमाइंदा होता हैए वैसे ही ज़िले में कलक्टर राज्य सरकार का नुमाइंदा होता है। सौभाग्य से गवर्नर के पास राज्य सरकार में हस्तक्षेप करने के बहुत कम अधिकार हैंए पर दुर्भाग्यवश कलक्टर के पास किसी भी पंचायत में हस्तक्षेप करने के असीम अधिकार हैं। राज्य सरकारें कलक्टर के ज़रिये पंचायतों में मनमाने ढंग से हस्तक्षेप कर रही हैं।
तो फेसला अब आप को करना है।
आप को पहले जेसा सरपंच चाहीये या ईमानदार और पूरी इमानदारी से आप की सेवा करने वाला
अगर आप ने इस बार सही
फेसला नहीं किया तो
आप को दुबारा बदलाव का मोका 5 साल बाद ही मिलेगा
मोहम्मद अली बादर वाला
09509304362
[10:09PM, 12/30/2014] मुहम्मद अली बादर वाला: जब सरपंच कुछ ग़लत काम करता है या भ्रष्टाचार करता है तो उसे सही करने का अधिकार क़ानून में लोगों को नहीं दिया गया है। ज़िलाधिकारी को उसके ख़िलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है। एक ज़िलाधिकारी के नीचे 1000 से भी अधिक पंचायतें होती हैं। ज़िलाधिकारी गांवों से बहुत दूर ज़िला मुख्यालय में बैठता है भला उसके लिए यह जानना कैसे संभव है कि कोई सरपंच अच्छा है या बुरा। जब लोग सरपंच के ख़िलाफ ज़िलाधिकारी से शिकायत करते हैं तो अधिकतर मामलों में तो उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई ही नहीं की जाती क्योंकि ज़िलाधिकारी के पास समय ही नहीं होता। यदि सरपंच सत्ताधारी पार्टी का होए या किसी स्थानीय विधायकए सांसद या अन्य किसी राजनीतिज्ञ से उसकी मित्रता हो तो प्रायः ज़िलाधिकारी दबाव में आकर वैसे ही कोई जांच नहीं करते। और इस प्रकार दोषी सरपंचों के ख़िलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती
तो दोस्तों पेहले ही सोच समज कर सरपंच का चुनाव करें
और
दोस्तों अपने अपने वार्ड में वार्ड मेंबर भी ऐसा ही चुने जो हमेसां गांव ही में रेहता हो और आप की स्म्स्सियाओं को सरपंच तक पहूँचा कर समाधान कारवां सके
मोहम्मद अली बादर वाला
09509304362