Thursday, 22 January 2015

हुजुर ताजुस शरिया

दुनिया के प्रभावशाली मुस्लिम चेहरों में अजहरी मियां का 22वां स्थान [खबर: अक्तुबर 20, 2014].बरेली (ब्यूरो)। दुनिया के खास मुस्लिम चेहरों मेंबरेलवी मसलक के धर्म गुरूताजुश्शरिया अल्लामा मुफ्ती मोहम्मद अख्तररजा खां (अजहरी मियां) 22 वें स्थान पर हैं। इस सूची में पूर्वराष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम भी हैं ।ओमान की द रॉयल इस्लामिक स्ट्रेटजिक स्टडी सेंटर(आरआईएसएससी) ने दुनिया भर के विभिन्न क्षेत्रों केख्याति प्राप्त पांच सौ प्रभावशाली मुस्लिमों की सूची तैयारकी, ओमान की द रॉयल अल-अलवायत इंस्टीट्यूट से संबद्ध दरॉयल इस्लामिक स्ट्रेटजिक स्टडी सेंटर (आरआईएसएससी) नेदुनिया भर के विभिन्न क्षेत्रों के ख्याति प्राप्त पांचसौ प्रभावशाली मुस्लिमों की सूची तैयार की है।प्रभावी मुस्लिम लोगों की इस सूची में अजहरी मियां का नाम22 वें स्थान पर रखा गया है ।• शख्सियत व परिचय:अजहरी मियां की पैदाईश 25 फरवरी 1942 में हुई।शुरुआती दौर में दरगाह आला हजरत स्थित दारुल उलूम मंजरेइस्लाम के उलमा से तालीम हासिल की। 1963 मेंअजहरी यूनिवर्सिटी (काहिरा) मिस्र में दाखिला लिया औरयहां से उच्च शिक्षा ग्रहण कर 1966 में पूरे मिस्र में टॉपकिया। मुफ्ती आजम हिंद हजरत मुस्तफा रजा खां औरमुफ्ती सय्यद अफजाल हुसैन उनके उस्तादों में रहे। 1967 सेशिक्षा देने का काम शुरू किया। 1978 में दरगाह आला हजरतस्थित मदरसा मंजरे इस्लाम के प्रधानाचार्य रहे। करीब 12सालों तक उन्होंने शिक्षण कार्य किया ।इस बीच 1968 में उनकी शादी हुई। इससे पहले 15जनवरी 1962 में मुफ्ती आजम हिंद ने उन्हेंअपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। उन्होंने पहला हज1983, दूसरा हज 1985, तीसरा हज 1986 में किया।इसी साल 31 अगस्त 1986 में मक्का शरीफ में इमाम-ए-हरमके पीछे नमाज न पढ़ने पर उन्हें सऊदी अरब हुकूमत ने गिरफ्तारकर लिया। इसका अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त विरोधहुआ। अंतत: सऊदी हुकूमत को माफी मांगनी पड़ी औरअजहरी मियां को रिहा कर दिया ।ताजुश्शरिया ने अब तक उर्दू और अरबी में 50 दीनी किताबेंलिखीं हैं। खास कर आला हजरत की लिखी उर्दूकी किताबों का अरबी में अनुवाद कर अरब दुनिया में फैलाया।उन्हें ताजुश्शरिया के खिताब से 1984 को जूनागढ़ (गुजरात)की उलमा कांफ्रेंस में नवाजा गया। आज मुस्लिमरुहानी शख्सियतों में उन्हें यह शर्फ हासिल है कि दुनिया भर मेंउनके लाखो मुरीद हैं ।• आप पर किताब:अजहरी मियां की शख्सियत और उनक दीनी व समाजी खिदमातपर मौलाना शहाबउद्दीन रजवी ने हयात ताजुश्शरिया नाम सेएक किताब भी लिखी है। जो प्रकाशित भी हो चुकी है ।

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