Monday, 13 January 2020

कॉम के हीरो

*बासनी की  एक  अजीमुशान
शख्सियत क्या आप  इनको जानते हो  ।।
आप मरहूम हाजी मोहम्मद इब्राहिम अब्दुल लतीफ मंडल (मस्तान डेयरी वाले मौजुदा सरपंच हाजी मोहम्मद सरदार भाई के वालिद साहब)


*नागौरी सोसायटी मुम्बईः-* 
आपके दिल में कौम का दर्द था आपने बम्बई में फेरी वालो (सरस वालों) और दुकानदारो के साथ हो रही नाइंसाफी से जिद्दोजहद शुरु की। पुराने वक्त में सरस वाले घर घर और होटलों में दूध पहुंचाते थ,े दूध का बिल गवलियों की तरफ से बधां और छुट्ठा (बाजार भाव) से बनता था। आपने बाजार में दलालो से और भैंसो वालो से मांग की के बाजार भाव तय करने में दुकानदारो को भी शामिल किया जाए। उन्होने आपकी बात नहीं मानी आपने कोर्ट में उनके खिलाफ केस कर दिया आपका साथ मरहूम हाजी अब्दुल गप्फार (कमाल डेयरी) मरहूम हाजी हासम (हाजी डेयरी), हाजी फारुख (सेन्ट्रल डेयरी), मरहूम हाजी सद्धीक (चॉकलेट), मरहूम हाजी जहूरदीन कालू वाले, मरहूम हाजी अमीर अहमद चांद वाले, मरहूम अब्दुल रशीद चौहान (कैप्टन), मरहूम हाजी अनवर हसन छावनी वाले, मरहूम हाजी अब्दुल गप्फार कुम्हारी (राजस्थान डेयरी) और गांव के सभी दुकानदारो ने दिया। काफी जद्दोजहद के बावजूद आप केस हार गए, आपने अपनी लड़ाई को आगे बढाते हुए बम्बई में दूध की हड़ताल करवा दी जिसमें अपने लोगो के साथ साथ नरीमन फारसी (फारसी डेयरी) चन्दू हलवाई, भाई शंकर गौरी शंकर, व्यास जी पाउडर वाला, और अब्दुल करीम दलाल ने भी दिया। हड़ताल की वजह से चिल्लियां ने मस्तान डेयरी का दूध भी उसी दिन बंद कर दिया। गांव के दुकानदारो ने थोड़ा थोड़ा दूध देकर मस्तान डेयरी को चालू रखा। 
इस हड़ताल में गांव के चन्द लोगो के साथ मौजूदा सरपंच भाई सरदार को अपने बचपन में ही गिरप्तार कर लिए गए और दस दिन तक कुर्ला वार्ड चौकी में बन्द रहे। हड़ताल के बाद भी कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद आपने झूला मैदान मदनपूरा में नागौरियों की आम मिटिंग रखी और नागौरी सोसायटी बनाने का फैसला किया। जिसमें आप के दोस्त शान्तिलाल सेठ आपको जलगांव लेकर गए। शांतीलाल सेठ ने अपनी जिनिंग फैक्टरी (कपास फैक्टरी) जलगांव स्टेशन के पास दूध रखने की जगह दी। और गांव गांव फिरकर दूध जमा करने का काम शुरु किया। बोरिवली में हाजी फखरु हल्लू वाले की दुकान पर दूध रखा गया। इस तरह आपने नागौरी सोसायटी की बुनियाद रखी गई और आप उसके सदर बने।  
आप कौम के लिए ऐसा दरख्त लगाकर गए जो पूरे साल दिन में दोनो वक्त आज भी फल दे रहा है। आपने कौम की बुनियाद को मजबूत किया।

महाराष्ट्र सरकार ने आपकी खिदमात को देखते हुए दो बार आपको स्पेशल एक्जिक्टिव मजिस्ट्रेट(special executive megistrate) बनाकर आपका सम्मान किया।


 *मदरसा मदीना तुल उलूम :-* 
फुलपुरा के छोटे बच्चे बाजार में मदरसा इस्लामिया रहमानिया में पढने जाते थे चुंकि मदरसे तक पहुंचने में काफी वक्त लग जाता था। आपने फुलपुरा के मोअज्जीज हजरात से मिलकर अपने बाड़े में पट्ठिया लगाकर मदरसे की बुनियाद रखवाई, बाद में मरहूम हाजी उस्मान (कुरेशी डेयरी ) वालो ने चार घरों की जमीन मदरसे के लिए दी। और कुछ जमीन रोशन चिराग कुआं से हासिल की गई। और मदरसा वजूद में आया। आज सैंकड़ो बच्चे इस से फेजिआब हो रहे है। मदरसा बनवाने की वजह से फुलपुरा वालो को बांग्लादेशी कहा गया।

 *नागौरी कौमी जमातः-* 
आप जमाअत बनाने में भी पेश पेश रहे, पहली जमाअत के नायब सदर बने और उसके बाद में सदर बने। जमाअत बनाने में हाजी अब्दुल रशीद बांगी, मरहूम हाजी मोहम्मद उस्मान एम एल ए साहब, हाजी अब्दुल गप्फार (आजम डेरी) के साथ मिलकर कौमी जमाअत बनाई।
हाजी अब्दुल गफ्फार अज़म साहब जमात के पहले सदर बनेl और आप नायब सदर बने

No comments:

Post a Comment