mohammed ali badar wala
basni behlima nagour
Wednesday, 27 May 2020
Monday, 11 May 2020
अरतुगुल गाज़ी 2
अरतुगुल गाजी 1
अरतुगुल गाज़ी 3
Monday, 13 January 2020
कॉम के हीरो
Friday, 13 January 2017
वाजिबाते नमाज़
*वाजिबाते नमाज़*
( *किस्त नo.*1⃣)
1.तकबीरे तेहरीमा में अल्लाहु'अकबर कहना।
2.फर्ज़ की तीसरी और चौथी रकात के अलावा बाकी तमाम नमाज़ों की हर रकात में अल'हम्द शरीफ पढ़ना, सूरत मिलाना या क़ुरआने मजीद की एक बड़ी आयत (जो छोटी तीन आयतों के बराबर हो)या तीन छोटी आयात पढ़ना।
3.अल'हम्द शरीफ का सूरत से पहले पढ़ना।
4.अल'हम्द और सूरत के दरमियान आमीन और बिस्मिल्लाह के अलावा कुछ ना पढ़ना।
5.किरा'अत के बाद फ़ौरन रुकू करना।
6.एक सजदे के बाद बित्तरतीब(तरतीब से) दूसरा सजदा करना।
7.तादीले अरकान यानी हर रुक्न को ठहर ठहर कर अदा करना(रुकू, सुजूद, कौमा और जलसा में कम अज़ कम एक बार सुबहान'अल्लाह कहने की मिक़दार ठहरना।
8.जलसा यानी दोनों सजदों के दरमियान सीधा बेठना कुछ लोग जल्दी जल्दी में सीधा बेठने से पहले ही दूसरा सजदा कर लेते हैं ऐसा करने से नमाज़ मकरूह तहरीमी होगी(इसको लौटाना वाजिब होगा)।
9.क़ादा ए ऊला वाजिब है अगरछे नमाज़ नफिल हो।
10.फर्ज़ वित्र और सुन्नते मो'अक्किदा के कादा ए ऊला में तशह्हुद(अत्तहिय्यात)के बाद कुछ ना पढ़ना।
11.दोनों का'अदों में तशह्हुद मुकम्मल पढ़ें।एक लफ्ज़ भी छूट जाये तो नमाज़ मकरूह तहरीमी होगी।
12.फर्ज़ वित्र और सुन्नते मो'अक्किदा के कादा ए ऊला में तशह्हुद के बाद अगर भूल कर "अल्लाहुम्मा सल्ले अला मुहम्मद" या "अल्लाहुम्मा सल्ले अला सय्यदिना" कह दिया तो सज्दा ए सहव वाजिब होगा-और जान बूझ कर कहा तो नमाज़ लौटाना वाजिब है
13.दोनों तरफ सलाम फेरते वक़्त लफ्ज़ अस्सलाम कहना वाजिब है(अलैकुम वाजिब नहीं बल्की सुन्नत है)।
14.वित्र में तकबीरे कुनूत कहना।
15.वित्र में दुआ ए कुनूत पढ़ना
16.ईदैन में 6 तकबीरें।
17.ईदैन में दूसरी रकात की तकबीरे रुकू और उस तकबीर के लिए लफ्ज़े "अल्लाहु अकबर" कहना।
18.जहरी नमाज़ जैसे मगरिब,इशा की पहली और दूसरी रकात में और फज़र, जुमा,ईदैन, तरावीह और रमजान शरीफ के वित्र की हर रकात में इमाम को जहर यानि(इतनी आवाज़ से किरात करना के 3 आदमी सुन सकें पढ़ना) वाजिब है।
19.गैर जहरी नमाज़ यानी ज़ोहर और असर में आहिस्ता आवाज़ में किरात करना।
20.हर फर्ज़ व वाजिब का उसकी जगह पर होना।
21.रुकू हर रकात में 1 ही बार करना।
22.सजदे हर रकात में 2 बार ही करना।
23.दूसरी रकात से पहले कादा ना करना।
24. चार रकात वाली नमाज़ में तीसरी रकात पर कादा ना करना।
25. आयते सज्दा पढ़ी हो तो सज्दा ए तिलावत करना।
26.सज्दा ए सहव वाजिब हो तो सज्दा ए सहव करना।
27.इमाम जब किरा'अत करे (चाहे आहिस्ता आवाज़ में करे या बुलन्द आवाज़ में करे)तो मुक़तदी को चुप रहना वाजिब है।
28.किरा'अत के अलावा बाकी तमाम नमाज़ों में इमाम साहब की पेरवी करना।